आत्मकारक क्या है?
आत्मकारक वह ग्रह है जो आपकी जन्म कुंडली में सबसे अधिक अंश पर होता है (विशेषकर 5 डिग्री से अधिक)। यह आपकी आत्मा की गहरी इच्छाओं, जीवन के उद्देश्य और आध्यात्मिक विकास का प्रतिनिधित्व करता है।
हर ग्रह के आत्मकारक होने का अलग अर्थ होता है - सूर्य आत्मकारक हो तो नेतृत्व की इच्छा, चंद्र हो तो भावनात्मक संतुष्टि की खोज।