आत्मकारक क्या है और इसका महत्व
शास्त्रों के मते, जन्म कुंडली में जो ग्रह सबसे अधिक अंश (degree) पर स्थित होता है, वही आत्मकारक कहलाता है।
जैमिनी सूत्रों में इसे आत्मा का कारक माना गया है — अर्थात वह ग्रह जो जीव की अंतरतम चाह, सीख और जीवन-दिशा की ओर संकेत करता है। यह ग्रह बताता है कि व्यक्ति का भीतरी संघर्ष और उसकी सच्ची अभिलाषा किस दिशा में है। ज्योतिषी इसे आत्म-जागरूकता और आध्यात्मिक प्रगति से जोड़कर देखते हैं। विकिपीडिया पर इस विषय की सामान्य जानकारी भी उपलब्ध है। यह जानकारी केवल आत्म-समझ में सहायक हो सकती है, किसी निष्कर्ष का दावा नहीं।