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केतु शांति के उपाय

केतु वैराग्य, आध्यात्म और पूर्व जन्म का कारक है। कमजोर केतु से दिशा भ्रम और अचानक कष्ट होता है। केतु शांति से आध्यात्मिक विकास होता है।

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केतु शांति के उपाय

केतु वैराग्य, आध्यात्म और पूर्व जन्म का कारक है। कमजोर केतु से दिशा भ्रम और अचानक कष्ट होता है। केतु शांति से आध्यात्मिक विकास होता है।

केतु के दोष

कमजोर केतु से जीवन दिशा में भ्रम, अचानक हानि, नींद संबंधी समस्या, त्वचा रोग और पूर्व जन्म के कर्मों का बोझ महसूस होता है।

केतु शांति के उपाय

गणेश जी की पूजा करें। कंबल, तिल, सरसों का तेल और काले वस्त्र का दान करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। लहसुनिया रत्न धारण करें।

केतु मंत्र

ॐ कें केतवे नमः - इस मंत्र का 108 बार जप करें। केतु बीज मंत्र ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

केतु शांति कब करनी चाहिए?
शनिवार या मंगलवार केतु शांति के लिए उत्तम है। केतु दशा या केतु दोष में विशेष लाभ।
केतु का रत्न कौन सा है?
केतु का रत्न लहसुनिया (कैट्स आई) है, जो शनिवार को धारण किया जाता है।