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वैदिक ज्योतिष में ग्रह

वैदिक ज्योतिष के 9 ग्रह हर कुंडली की नींव हैं। हर ग्रह एक अलग ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है और जीवन के विशेष क्षेत्रों को नियंत्रित करता है। इनकी प्रकृति जानने से आप अपनी कुंडली और प्रवृत्तियों को समझ पाते हैं।

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वैदिक ज्योतिष में ग्रह

वैदिक ज्योतिष के 9 ग्रह हर कुंडली की नींव हैं। हर ग्रह एक अलग ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है और जीवन के विशेष क्षेत्रों को नियंत्रित करता है। इनकी प्रकृति जानने से आप अपनी कुंडली और प्रवृत्तियों को समझ पाते हैं।

शुभ और अशुभ ग्रह

गुरु, शुक्र, बुध और अच्छी स्थिति वाला चंद्र शुभ माने जाते हैं - ये विकास, प्रेम, बुद्धि और शांति देते हैं। शनि, मंगल, राहु और केतु अशुभ ग्रह हैं जो अनुशासन, प्रयास, चुनौती और परिवर्तन लाते हैं। सूर्य और बुध तटस्थ हैं, इनका फल स्थिति से बदलता है।

ग्रहों के कारकत्व

सूर्य आत्मा, अधिकार और पिता का कारक है। चंद्र मन, माता और भावनाओं का। मंगल साहस, भाई-बहन और ऊर्जा का। बुध बुद्धि, वाणी और व्यापार का। गुरु ज्ञान, धन और आध्यात्म का। शुक्र प्रेम, विवाह और सुख-सुविधा का। शनि कर्म, विलंब और अनुशासन का। राहु इच्छाओं और विदेशी चीजों का, केतु वैराग्य और पूर्व जन्म का।

भावों में ग्रह

ग्रह आपके 12 भावों में कहां बैठा है, यह उसकी ऊर्जा के प्रकट होने का तरीका बदल देता है। जैसे दूसरे भाव में गुरु धन और अच्छी वाणी देता है, जबकि बारहवें भाव में गुरु आध्यात्मिकता और विदेश यात्रा देता है। भाव, राशि और दृष्टि मिलकर अंतिम फल तय करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कौन सा ग्रह सबसे महत्वपूर्ण है?
मन और भावनाओं के लिए चंद्र, पहचान के लिए सूर्य, और पूरी कुंडली के लिए लग्नेश (लग्न का स्वामी) सबसे महत्वपूर्ण है।
क्या ग्रह राशि बदलने पर बदलते हैं?
हां। ग्रहों की दैनिक गोचर (ट्रांजिट) वर्तमान घटनाओं को प्रभावित करती है, जबकि जन्म कुंडली आपकी स्थायी प्रकृति दिखाती है।