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वैदिक ज्योतिष की मूल बातें

वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) जीवन पर ग्रहों के प्रभाव का प्राचीन भारतीय विज्ञान है। यह आपके जन्म के समय ग्रहों की स्थिति पढ़कर आपके व्यक्तित्व, प्रवृत्तियों और जीवन मार्ग को समझाता है।

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वैदिक ज्योतिष की मूल बातें

वैदिक ज्योतिष (ज्योतिष शास्त्र) जीवन पर ग्रहों के प्रभाव का प्राचीन भारतीय विज्ञान है। यह आपके जन्म के समय ग्रहों की स्थिति पढ़कर आपके व्यक्तित्व, प्रवृत्तियों और जीवन मार्ग को समझाता है।

कुंडली क्या है?

कुंडली आपके जन्म के समय आकाश का एक स्नैपशॉट है। इसे 12 भावों में बांटा गया है, हर भाव जीवन का एक क्षेत्र दिखाता है - स्वयं, धन, भाई-बहन, परिवार, संतान, स्वास्थ्य, विवाह, करियर और अधिक। ग्रह इन भावों और राशियों में बैठकर आपके जीवन का नक्शा बनाते हैं।

9 ग्रह

वैदिक ज्योतिष में 9 ग्रह होते हैं - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। हर ग्रह विशेष गुणों का स्वामी है: सूर्य अधिकार का, चंद्र मन का, मंगल साहस का, शुक्र प्रेम का और शनि अनुशासन का।

राशियां और नक्षत्र

राशि चक्र में 12 राशियां (मेष से मीन) और 27 नक्षत्र होते हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि चंद्र मन और भावनाओं का स्वामी है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या वैदिक और पाश्चात्य ज्योतिष अलग हैं?
हां। वैदिक ज्योतिष स्थिर (साइड्रियल) राशि चक्र का उपयोग करता है जो तारों की वास्तविक स्थिति पर आधारित है, जबकि पाश्चात्य ज्योतिष ऋतुओं पर आधारित है। इसलिए एक ही तारीख दोनों में अलग राशि में पड़ सकती है।
कुंडली पढ़ने के लिए क्या चाहिए?
आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान। सटीक जन्म समय लग्न और भावों की स्थिति के लिए सबसे जरूरी है।