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दैनिक पंचांग

करण विवरण

हिंदू कैलेंडर में आज का करण (तिथि का आधा भाग) जानें। शुभ समय के लिए वर्तमान करण और उसका महत्व देखें।

करण क्या है?

करण हिंदू पंचांग की एक इकाई है जो तिथि का आधा भाग होती है। हर तिथि में दो करण होते हैं - पहला भाग और दूसरा भाग। पंचांग के पांच अंगों में करण चौथा अंग है।

कुल 11 करण होते हैं - 7 चर (गतिशील) करण: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा)। और 4 स्थिर करण: शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न।

करण का उपयोग शुभ-अशुभ समय निर्धारित करने में होता है। विष्टि करण (भद्रा) को अशुभ माना जाता है, जबकि अन्य करणों में शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

करण का महत्व

करण यह निर्धारित करने में मदद करता है कि किसी विशेष समय में कौन से कार्य करने चाहिए और किनसे बचना चाहिए। यह विशेष रूप से मुहूर्त चयन में महत्वपूर्ण है।

भद्रा (विष्टि करण) के समय शुभ कार्य - जैसे विवाह, गृह प्रवेश - नहीं करने चाहिए। वहीं बव, बालव जैसे करण शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

यात्रा, व्यापार और नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी करण का विचार किया जाता है।

करण कैसे जानें?

ऊपर दिए गए टूल में अपने शहर का नाम चुनें और "करण देखें" बटन दबाएं। आपको आज का करण और उसकी विस्तृत जानकारी तुरंत मिल जाएगी।

यह जानकारी वैदिक खगोलीय गणनाओं पर आधारित है और आपके शहर के अनुसार सटीक होती है।

करण कैलकुलेटर कैसे उपयोग करें?

स्टेप 1: अपने शहर या क्षेत्र का नाम लिखें या "मेरा स्थान उपयोग करें" दबाएं।

स्टेप 2: "करण देखें" बटन दबाएं।

स्टेप 3: आज का करण और उसका महत्व देखें।