करण क्या है?
करण हिंदू पंचांग की एक इकाई है जो तिथि का आधा भाग होती है। हर तिथि में दो करण होते हैं - पहला भाग और दूसरा भाग। पंचांग के पांच अंगों में करण चौथा अंग है।
कुल 11 करण होते हैं - 7 चर (गतिशील) करण: बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि (भद्रा)। और 4 स्थिर करण: शकुनि, चतुष्पद, नाग, किंस्तुघ्न।
करण का उपयोग शुभ-अशुभ समय निर्धारित करने में होता है। विष्टि करण (भद्रा) को अशुभ माना जाता है, जबकि अन्य करणों में शुभ कार्य किए जा सकते हैं।